तरक्की का सफ़र

लेखक: राज अग्रवाल


 भाग-७


 

प्रीती की कहानी सुनने के बाद मुझे सही में लगा कि जो कुछ मैंने किया वो गलत किया था। खैर जो होना था सो हो गया, अब वो बदला नहीं जा सकता था। मैंने प्रीती से कहा, प्रीती! मैंने कुछ दिन बाद ही तुमसे माफ़ी माँग ली थी, उसके बाद भी मैं कई बार तुमसे माफ़ी माँग चुका हूँ, पर तुमने मेरी एक नहीं सुनी। आज फिर मैं दिल से तुमसे माफ़ी माँग रहा हूँ, मुझे माफ़ कर दो।

 

हाँ मुझे मालूम है, और मैं तुम्हें उस दिन भी माफ़ कर सकती थी, पर मैं तुम्हें एक सबक सिखाना चाहती थी। आज वो पूरा हो गया, प्रीती ने जवाब देते हुए कहा, राज मैं एक शर्त पर ही तुम्हें माफ़ करूँगी! अगर तुम मुझे एम-डी और महेश से बदला लेने में मेरी मदद करोगे?

 

मेरा वादा है तुमसे! मैं तुम्हारी पूरी मदद करूँगा। मैंने जवाब दिया। अब अंजू और मंजू के बारे में क्या करना है? अगर ये दोनों प्रेगनेंट हो गयी तो?

 

इसके बारे में मैंने सोच लिया है, सुबह मैं दोनों को डॉक्टर के पास ले गयी थी, इतनी जल्दी तो कुछ पता नहीं चलेगा किंतु भविष्य के लिये उसने बर्थ कंट्रोल पिल्स दे दी हैं, प्रीती ने जवाब दिया।

 

लेकिन अब इन दोनों का यहाँ क्या काम है, क्या तुम्हारा इनसे मक्सद पूरा नहीं हुआ? मैंने पूछा।

 

भाभी का हो गया होगा पर हमारा नहीं! अभी हम कुछ दिन और यहाँ रुकना चाहते हैं और खूब चुदाई करना चाहते है, क्यों भाभी ठीक है ना? अंजू ने प्रीती से पूछा।

 

क्या तुम लोग भी यहाँ रहकर वेश्या बनना चाहती हो? तुम लोगों का दिमाग खराब हो गया है? मैंने थोड़ा झल्लाते हुए कहा।

 

हाँ भैया! हम लोग पागल हो गये हैं, और एम-डी और उसके दोस्तों से चुदवा कर उनको पागल कर देंगे, जिन्होंने भाभी को उन सबसे चुदवाने पर मजबूर कर दिया था, और साथ ही साथ पैसा भी कमाना चाहते हैं, मंजू ने कहा।    इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

पर मैंने तो प्रीती से नहीं कहा था उन लोगों से चुदवाने को! मैं थोड़ा गुस्से में बोला।

 

नहीं भैया! आप गलत हो, जिस दिन आपने एम-डी और महेश को भाभी को चोदने दिया उसी दिन आपने भाभी को दूसरों से चुदवाने के लिये मजबूर कर दिया था, अंजू ने कहा।

 

हाँ भैया और हमारी शादी से पहले चुदाई भी आपके कारण ही हुई है, मंजू ने कहा।

 

पर ये मैंने नहीं, तुम्हारी भाभी ने किया है, मैंने रोते हुए कहा।

 

अगर आपने प्रीती भाभी के साथ ये सब ना किया होता तो ये हमारे साथ इस तरह ना करती, अंजू बोली।

 

प्रीती! तुम ही इन्हें समझाओ ना कि तुम्हारा बदला पूरा हो चुका है, मैंने मिन्नत करते हुए कहा।

 

करने दो इन दोनों को, इन्हें कोई तकलीफ़ नहीं होगी... मैं हमेशा साथ रहुँगी। आओ पहले मैं तुम्हें इन दोनों की कुँवारी चूत के फटने की कुछ तसवीरें दिखाती हूँ, प्रीती ने पर्स में से तसवीरें निकालते हुए कहा।

 

भाभी! आप ने हम लोगों की तसवीरें कब निकाली? अंजू ने पूछा।

 

भाभी आप बड़ी बदमाश हो, आपको ऐसा नहीं करना चाहिये था, मंजू बोली।

 

उनकी अलग-अलग रूप में चुदाई की तसवीरें देख कर मैं पागल सा हो गया, बस अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं होता, कहकर मैंने वो तसवीरें फेंक दीं।

 

चलो लड़कियों! अब नहा धो कर तैयार हो जाओ, तब तक मैं फोन करके पास के होटल से खाना मंगवा लेती हूँ, आज मैंने बहुत पी ली है... खाना बनाने की हिम्मत नहीं है मुझमें, प्रीती ने उन दोनों से कहा।

 

खाना खाते समय हम लोग बातें कर रहे थे कि प्रीती बोली, चलो अब तुम लोग भी सोने जाओ और मैं भी सोने जा रही हूँ।

 

इतनी जल्दी भाभी? अभी तो बहुत वक्त पड़ा है, अंजू बोली।    इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

हाँ इतनी जल्दी! क्योंकि आज मैं तुम्हारे भैया के लंड की एक-एक बूँद अपनी चूत में ले लूँगी। कई दिन हो गये हैं तुम्हारे भैया के मोटे लंड से नहीं चुदवाया है... कहकर प्रीती मुझे घसीट कर बेडरूम में ले आयी।

 

रात भर हम जमकर चुदाई करते रहे। प्रीती ने मुझे एक पल भी साँस नहीं लेने दी।

 

अगले दिन मैं जब ऑफिस पहुँचा तो महेश मुझे एक नये केबिन की और ले गया। दरवाजे पर नेम प्लेट लगी थी, राज अग्रवाल {फायनेंस और अकाऊँट्स मैनेजर} थैंक यू सर, मैंने खुश होते हुए कहा।

 

मुझे नहीं! अपने एम-डी साहिब को थैंक यू बोलो, उन्होंने रातों रात इसे तैयार करवाया है, जाओ अब मजे लो... स्पेशियली इस नये सोफ़े का। तुम्हारी तीनों एसिस्टेंट्स इंतज़ार कर रही हैं... महेश हँसते हुए बोला।

 

नया केबिन पहले केबिन से बड़ा था और उसकी खासियत यह थी कि उसमें सोफ़ा-कम-बेड भी था। अपनी तीनों एसिस्टेंट्स को बुला कर मैंने नये सोफ़े पर चुदाई का आनंद लिया।    इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

शनिवार को महेश ने मुझे होटल शेराटन के सूईट में पहुँचने को कहा। शाम को मैंने प्रीती को बताया, तो उसने कहा, तुम्हारा सही इनाम मिलने का वक्त आ गया है, शायद कोई बिना चुदी चूत हो...

 

मेरा दिल नहीं कर रहा जाने के लिये, मैंने कहा।

 

नहीं राज तुम्हें जाना चाहिये! जाओ और चुदाई का मजा लो, मैं बुरा नहीं मानूँगी, कसम से, वैसे भी हम तीनों बिज़ी हैं... प्रीती ने कहा।

 

जब मैं होटल के सूईट में पहुँचा तो एम-डी और महेश को मेरा इंतज़ार करते पाया, आओ राज बैठो और अपने लिये ड्रिंक बना लो।

 

मैं अपने लिये ड्रिंक बना कर सोफ़े पर बैठ गया और शक की निगाहों से उन्हें देखने लगा।

 

डरो मत राज! आज हमने तुमसे कुछ लेने नहीं, बल्कि तुम्हें तुम्हारे काम का इनाम देने के लिये बुलाया है, इसलिये निश्चिंत हो जाओ, एम-डी ने अपने ग्लास में से घूँट भरते हुए कहा।

 

राज तुमने सुना तो होगा कि मैंने अपनी ऑफिस की हर औरत को चोदा है? एम-डी ने मुझसे पूछा।

 

हाँ सर! कुछ ऐसी अफ़वाह सुनी तो है... मैंने जवाब दिया।    इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

ये अफ़वाह नहीं, हकीकत है राज! मैंने और महेश ने ऑफिस में काम करने वाली हर लड़की या औरत को खूब चोदा है। नयी-नयी लड़कियों को चोदने के बाद यहाँ काम पर लगाया है। आज हम दोनों तुम्हें अपना राज़दार और हिस्सेदार बनाना चाहते हैं, एम-डी ने गर्व से कहा, मगर मैंने ये नहीं सोच था।

 

इसका मतलब है कि तुम ऑफिस की किसी भी औरत को अपने नये केबिन में बुला कर उसे चोद सकते हो, तुम्हें मेरी परमिशन है इस काम के लिये।

 

थैंक यू सर, मैंने जवाब दिया।

 

मेरे ऑफिस में कई लड़कियाँ थीं जिन्हें मैं चोदना चाहता था। इस बात ने मेरा काम और आसान कर दिया था। ये सोच मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी थी।

 

महेश ने ताली बजाते हुए कहा, राज... कल का क्यों इंतज़ार करें! आओ आज से ही शुरू करते हैं।

 

महेश के ताली बजते ही बेडरूम से दो निहायत ही सुंदर लड़कियाँ बाहर निकल कर आयी। दोनों के हाथों में शराब के ग्लास और सिगरेट थीं। ये रेहाना है, हमारे डिसपैच डिपार्टमेंट से और ये नसरीन है हमारी ब्राँच ऑफिस से, महेश ने मेरा उनसे परिचय कराते हुए कहा।

 

पहले कभी इन्हें देखा है? मैंने आज की रात सबसे बेहतरीन लड़कियों को अपनी ऑफिस और ब्रन्च ऑफिस से चुना है... एम-डी ने कहा।

 

सर रेहाना को मैंने देखा है, और इसे चोदना भी चाहता था पर नसरीन मेरे लिये नयी है... मैंने जवाब दिया।

 

चिंता मत करो! थोड़े दिनों में सबको जान जाओगे..., लड़कियों! ये राज है और आज से इसे मेरी परमिशन है कि ये तुम सबको जब जी चाहे चोद सकता है, ये बात औरों को भी बता देना, समझ गयी तुम दोनों? एम-डी ने उनसे कहा।

 

हाँ सर! हम समझ गये, रेहाना ने अपनी गर्दन हिलाते हुए सिगरेट का धुँआ बाहर छोड़ते हुए कहा।

 

चलो फिर शुरू हो जाओ और अपना छुपा हुआ खज़ाना राज को दिखाओ, महेश ने हुक्म दिया।

 

दोनों अपने कपड़े उतारने लगी। दोनों ही काफी सुंदर थी, भरी-भरी छातियाँ, पतली-पतली कमर, बिना बालों की चूत काफी शानदार लग रही थी, तरबूज जैसी गाँड, लंबी-लंबी सुडौल टाँगें और अंत में गोरे- गोरे पैरों में बहुत ही सैक्सी और ऊँची ऐड़ी वाली सैंडल। उन्हें नंगा देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया।

 

चलो महेश यहाँ से! और राज को चुदाई का पूरा आनंद लेने दो, एम-डी ने कहा।

 

रुकिये सर, आपने कहा कि मैं आज से आपका पार्टनर और राज़दार हूँ तो क्यों ना हम लोग मिलकर इन्हें चोदें? मैंने एम-डी से कहा।

 

देखा महेश! मैं नहीं कहता था कि अपना राज मतलबी नहीं है, ये सब कुछ शेयर करना चाहता है, एम-डी खुश होते हुए बोला, लेकिन राज ये दो हैं और हम तीन...

 

सर औरत के पास तीन छेद होते हैं, मर्द को मज़ा देने के लिये, चूत गाँड और मुँह... और इसके लिये हम तीन हैं।

 

मेरे लिये ये नयी बात होगी, एम-डी ने कहा, चलो महेश... कपड़े उतारते हैं और ट्राई करते हैं।

 

सर हम लोग एक-एक कर के तीनों छेदों का मज़ा लेंगे, मैंने एम-डी को समझाया।    इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

ओह गॉड!!! हम तीनों को नंगा देखते हुए एक ही झटके में अपना पैग गटकते हुए रेहाना बोली।

 

एम-डी की नज़र जब मेरे लंड पर पड़ी तो उसने हँसते हुए कहा, महेश! देखो राज का लंड तुमसे बड़ा और मोटा है, अब तुम्हारे मोटे लंड के किस्से ही रह जायेंगे।

 

रेहाना ने मेरे लंबे लंड को देखते हुए कहा, सर!!! मैं ये लंबा लंड अपनी गाँड में नहीं लूँगी।

 

रेहाना! तुम्हें पता है मुझे ना सुनने की आदत नहीं है, इसलिये राज तुम्हारी गाँड में अपना लंड डालेगा। फिर रेहाना ने विरोध नहीं किया। रेहाना वैसे भी काफी नशे की हालत में थी।

 

एम-डी बिस्तर पर लेट गया और रेहाना ने एम-डी के ऊपर आकर उसका लंड अपनी चूत में ले लिया और उछलने लगी। एम-डी का लंड जड़ तक उसकी चूत में समा चुका था। रेहाना की गाँड उभरी हुई थी। अपने लंड को सहलाते हुए मैं अपने थूक से उसकी गाँड को चिकना कर रहा था।

 

राज ये कोई तरीका नहीं है इतनी सुंदर गाँड मारने का, मैं होता तो एक ही धक्के में पूरा लंड डाल देता... महेश ने कहा।

 

क्या उसे दर्द नहीं होगा? मैंने कहा।

 

हाँ... उसे दर्द तो होगा, पर जब वो दर्द से चींखेगी तो उसके दर्द की आवाज़ मुझे अपने कानों में संगीत की तरह लगती है... महेश बोला।

 

तुम्हें जैसे करना है, वैसे करना, मुझे अपने तरीके से करने दो, मैंने जवाब दिया। रेहाना मेरी और देख कर मुस्कुरा दी। उसकी आँखें नशे में बोझल थीं। मैंने अपने लंड और उसकी गाँड को चिकना कर अपने लंड को गाँड के छेद पर रख कर थोड़ा अंदर घुसाया।

 

ऊऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईई प्लीज़ सर!!! रुक जाइये, बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊँगी, रेहाना दर्द से चिल्लायी।

 

राज रुकना नहीं! और जोर से डालो, एम-डी ने कहा। मैंने अपने लंड को और अंदर घुसाया।

 

ऊऊऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईईईईईईईई....... अल्लाहहहहह मर गयीईईईई... रेहाना जोर से चींखी।

 

मैंने रेहाना की गाँड में धक्के लगाते हुए महेश से कहा, अब तुम अपना लंड रेहाना के मुँह में दे दो।

 

मैं ऊपर से गाँड मर रहा था और एम-डी नीचे से धक्के लगा कर उसकी चूत को चोद रहा था। रेहाना जोर-जोर से महेश के लंड को चूस रही थी। करीब पाँच मिनट के बाद हमारे तीनों के लंड ने रेहाना के तीनों छेद मैं पानी छोड़ दिया।    इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

नसरीन!! अब तुम्हारी बारी है, महेश ने कहा।

 

ठीक है सर! राज सर का लंड अपनी गाँड में लेकर मुझे खुशी होगी, नसरीन ने जवाब दिया, लेकिन सर इजाज़त हो तो पहले मैं अपनी डोज़ ले लूँ?

 

जरूर.... लेकिन जल्दी एम-डी ने कहा।

 

मुझे कनफ्यूज़्ड देख कर महेश ने बाताया कि नसरीन चुदाई के समय ड्रग्स लेती है और फिर बहुत मस्त हो कर चुदवाती है। मैंने देखा कि नसरीन ने अपने पर्स में से एक पैकेट निकाला और एक सफ़ेद से पाऊडर की मेज पर धारी सी बना दी और फिर एक सौ रुपये के नोट को रोल करके उसके द्वारा वो पाऊडर अपनी नाक में खींचने लगी।

 

चलिये सर... अब मैं तैयार हुँ, चुदाई के लिये... नसरीन अपना बाकी का पैग गटकते हुए बोली। उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी और उसकी आँखों की पुतलियाँ फैली हुई थीं।

 

इस बार महेश बिस्तर पर लेट गया और नसरीन उसके लंड को अपनी चूत में लेकर उस पर लेट गयी। एम-डी ने अपना लंड उसके मुँह में दिया। मैंने ऊपर आकर उसकी गाँड में एक ही धक्के में पूरा लंड पेल दिया।

 

हम तीनों जोर-जोर के धक्के लगाते हुए उसे चोद रहे थे। नसरीन की गाँड रेहाना की गाँड से कसी थी इसलिये मुझे और मज़ा आ रहा था। नसरीन की सिसकरियाँ भी तेज थी।

 

हम तीनों ने जम-जम कर धक्के मारते हुए अपना अपना पानी छोड़ दिया। थोड़ी देर बाद एम-डी ने कहा, राज तुम मज़े लो, हम लोग जाते हैं, देर हो रही है।

 

उनके जाने के बाद मैंने एक-एक बार और उन दोनों की चुदाई की और रात के दो बजे घर पहुँचा।    इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

मैं दूसरे दिन ऑफिस पहुँचा तो मुझे सभी महिला एम्पलोयिज़ की लिस्ट मिल गयी। उनका नाम, उम्र, किस डिपार्टमेंट में काम करती है और कितने साल से। उस दिन के बाद मैं एक-एक करके उनको अपने केबिन में बुला कर उन्हें चोदने लगा।

 

थोड़े ही दिन में ये बात आग की तरह फ़ैल गयी कि मेरा लंड महेश के लंड से मोटा है।

 

थोड़े दिन बाद पिताजी की चिट्ठी आयी कि मैं अंजू और मंजू को वापस भेज दूँ। मैंने उन दोनों की टिकट करा दी। जिस दिन वो जा रही थीं, मैंने उनसे कहा, तुम दोनों वादा करो कि यहाँ से जाने के बाद ये सब छोड़ दोगी?

 

भैया! हम आपसे वादा करते हैं कि अब शादी से पहले किसी से नहीं चुदवायेंगे, मंजू ने कहा।

 

उन दोनों को ट्रेन में बिठा कर मैं घर पहुँचा तो प्रीती ने कहा, राज अब अंजू और मंजू यहाँ से जा चुकी हैं तो क्यों ना हम एम-डी और महेश से अपना बदला लेने का प्लैन बनायें।

 

तुम क्या करना चाहती हो? मैंने पूछा।

 

सबसे पहले मैं उनके बारे में सब कुछ जानना चाहुँगी, प्रीती ने कहा।

 

तुम उन दोनों से इतनी बार चुदवा चुकी हो, और क्या जानना चहोगी? मैंने कहा।

 

मजाक मत करो, मैं उनकी हर बात जानना चाहती हूँ, जिससे उनकी कमजोरियों का पता चल सके, राज! तुम जितना भी जानते हो मुझे बताओ, प्रीती बोली।

 

महेश के बारे में इतना नहीं जानता। पर हाँ एम-डी, मिसेज योगिता के साथ उनके ही बंगले पर रहते हैं, उनकी बीवी का नाम मिली है और उनकी दो बेटियाँ हैं, मैंने जवाब दिया।

 

दो बेटियाँ! प्रीती के चेहरे पर मुस्कान आ गयी।

 

मैं जानता हूँ तुम क्या सोच रही हो पर अभी वो छोटी हैं, मैंने कहा।

 

राज! तुम मिस्टर रजनीश, तुम्हारे एक्स एम-डी के परिवार के बारे में क्या जानते हो? प्रीती ने पूछा।

 

यही कि उनकी विधवा मिसेज योगिता, और उनकी लड़की रजनी साथ में रहती हैं। एम-डी रजनी को अपनी बेटियों से भी ज्यादा प्यार करता है, मैंने जवाब दिया।

 

तुम्हें ये कैसे मालूम? उसने पूछा।

 

मुझे रजनी ने बताया था, उसने छुट्टियों में कुछ दिन कंपनी में काम किया था। मैंने जवाब दिया।

 

क्या तुमने रजनी को चोदा है? मुझे सच- सच बताना, उसने पूछा।

 

कुछ देर सोचते रहने के बाद मैंने सच बताते हुए कहा, हाँ! मैंने उसे चोदा है पर वो हमारी शादी के पहले की बात है।

 

उस समय वो कुँवारी थी! है ना? क्या उसके बाद तुमने उसे चोदा है? प्रीती ने फिर पूछा।

 

नहीं प्रीती! कसम ले लो, मैंने उसके बाद उसे एक बार ही मिला हूँ, वो भी पार्टी में तुम्हारे साथ, मैंने जवाब दिया।

 

राज मैं जानती हूँ तुम सच बोल रहे हो! जब तुम झूठ बोलते हो तो तुम्हारे चेहरे से पता चल जाता है। रजनी तुम्हें प्यार करती है, मैंने उसकी आँखों में तुम्हारे लिये प्यार देखा है, क्या तुम जानते हो? प्रीती ने कहा।

 

मुझे भी ऐसा कई बार लगा है, मैंने जवाब दिया।

 

क्या पता तुम्हें फिर रजनी को चोदना पड़े, प्रीती ने मुझे बाँहों में भरते हुए कहा, फिलहाल तो रजनी को भूल जाओ, वो यहाँ नहीं है! पर मैं तो हूँ, राज! मुझे चोदो और इतना चोदो कि मेरी चूत माफी माँगने लगे।

 

मैं उसे बाँहों में भर कर बेडरूम में ले गया और पूरी रात उसे कस-कस कर चोदता रहा।    इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

दूसरे दिन से प्रीती एम-डी और महेश के घर जाने लगी। वो बराबर उनसे और उनके परिवार से मिलने लगी। अब वो उनके परिवार की एक सदस्या जैसे हो गयी थी। एक दिन मैंने उससे पूछा, क्या पता लगाया तुमने इतने दिनों में?

 

कुछ खास नहीं, महेश के दो बच्चे हैं! एक लड़की मीना २२ साल की... जो अपना ग्रैजुयेशन कर रही है और एक लड़का अमित १६ का। लगता है महेश घर से ज्यादा बाहर चुदाई करता है, प्रीती ने हँसते हुए कहा, मीना और मैं अच्छे दोस्त बन गये हैं।

 

एम-डी के बारे में क्या पता लगा? मैंने पूछा।

 

वहाँ भी कुछ खास हाथ नहीं लगा। मिसेज योगिता और मिसेज मिली, अच्छी सहेलियाँ हैं, और हाँ तुमने सच कहा था! उनकी बेटियाँ छोटी हैं। हाँ! रजनी और मैं अच्छे दोस्त बन गये हैं। मैंने हार नहीं मानी है, एक दिन भगवान हमारी मदद जरूर करेगा।

 

करीब तीन महीने बाद मुझे पिताजी की चिट्ठी मिली कि अंजू और मंजू की शादी पक्की हो गयी। करीब के गाँव के जमीनदार के लड़कों के साथ। हम दोनों को शादी में बुलाया था।

 

मैं और प्रीती हमारे घर शादी अटेंड करने पहुँचे। देखा अंजू और मंजू बहुत खुश थीं। शादी के दिन जब हम अकेले में मिले तो प्रीती ने उनसे पूछा, तुम दोनों को कोई शिकायत तो नहीं है?

 

अंजू ने मंजू की तरफ देख कर कहा, सिर्फ़ एक!

 

और वो क्या है? प्रीती ने पूछा।    इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

हम इतने दिन वहाँ रहे पर भैया को हम इतने सुंदर नहीं दिखे कि वो हमें चोद सके, अंजू ने कहा।

 

अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है, तुम भी यहीं हो और तुम्हारे भैया भी! जाओ और चुदवा लो उनसे, मैं बुरा नहीं मानुँगी, प्रीती ने हँसते हुए कहा।

 

प्रीती! अपनी सीमा में रहो, मैंने अपनी बहनों को बाँहों में भरते हुए कहा, ऐसी बात नहीं है पगली, जब तुम दोनों का नंगा बदन देखा तो मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया था, अगर तुम दोनों मेरी बहनें ना होती तो उसी समय तुम दोनों को चोद देता।

 

मैं भी इस चीज़ को मानती हूँ, रिश्तों की कदर करनी चाहिये, प्रीती बीच में बोली, अब तुम दोनों को अपनी सुहागरात का इंतज़ार होगा?

 

हाँ भाभी, तीन महीने हो गये चुदवाये, अँगुली से अपनी चूत चोद-चोद कर देखो हमारी अँगुली भी घिस कर एक इंच छोटी हो गयी है, मंजू ने अपनी अँगुली दिखाते हुए कहा।

 

मैं तो यही प्रार्थना करती हूँ कि सब अच्छी तरह से हो जाये, हमारे पतियों को ये ना पता चले कि हमारी चूत कुँवारी नहीं है, अंजू थोड़ा सिरियस होते हुए बोली।

 

घबराओ मत! सब ठीक होगा, प्रीती ने उन्हें सांतवना दी।

 

शादी के बाद हम लोग वापस लौट आये। प्रीती बराबर एम-डी और महेश के घर जाती रही। हमारी चुदाई वैसे ही चल रही थी। मैं ऑफिस में लड़कियों को चोदता और प्रीती को घर पर। प्रीती भी घर पर मुझसे चुदवाती और क्लब में दूसरों से। वो चाहे एम-डी और महेश से कितनी भी गुस्सा हो पर मुझे लगने लगा था कि प्रीती को यह शबाब-शराब से भरपूर ऐय्याश लाइफ स्टाईल रास आ गया था। उसकी चुदाई की आग पहले से बहुत बढ़ गयी थी।   इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

एक दिन मैं ऑफिस से घर लौटा तो देखा प्रीती एक खत फढ़ रही थी, और जोर-जोर से हँस रही थी।

 

किसका खत है? मैंने पूछा।

 

लो तुम ही पढ़ के देख लो, प्रीती ने मेरे हाथ में खत पकड़ा दिया।

 

मैंने खत लेके पढ़ा.............................

 

हमारी प्यारी भाभी,

 

सॉरी हम दोनों आप को खत नहीं लिख पाये।

 

हम दोनों बहुत मज़े में हैं। हमारे पति बहुत ही अच्छे इनसान है। हर रात को हमारी जमकर चुदाई करते हैं। मैं शुरू से बताती हूँ।

 

हाँ हमारी सुहागरात की रात से! हमारे पतियों ने पहले किसी लड़की को चोदा नहीं था, इसलिये जल्दबाज़ी में उन्हें हमारे कुँवारे ना होने का पता नहीं चला। फिर भी हम उन्हें कहते रहे, जरा धीरे-धीरे करो, दर्द हो रहा है।

 

कुछ महीनों तक ऐसे ही चलता रहा। फिर हमें चुदाई में इतना मज़ा नहीं आता था, क्योंकि हमारे पति बहुत ही सीधे हैं। ना तो वो हमारी चूत चाटते हैं, ना ही हमे अपना लौड़ा चूसने देते हैं। गाँड मारने की बात तो जाने दो।

 

फिर हम दोनों ने मिलकर इसका उपाय निकाला। हम दोनों ने एक दूसरे के पति को पटाया और उनसे चुदवा लिया। फिर एक बार हमने नाटक करके एक दूसरे को दूसरे के पति के साथ पकड़ लिया। हमारे पति इतने सीधे हैं कि हमसे माफी माँगने लगे। हमने उन्हें माफ़ किया पर एक शर्त पर कि वो हमें साथ-साथ चोदेंगे।

 

अब हम चारों साथ में ही सोते हैं, जैसे राम और श्याम के साथ सोते थे। हमने उन्हें चूत चाटना भी सिखा दिया है और हम उनका लंड भी मज़े से चूसते हैं। हम चारों का आपके पास आने को बहुत मन कर रहा है।

 

और आपका क्या हल है? भैया को हमारा प्यार देना।

 

बाय-बाय!

 

आपकी रंडी ननदें, अंजू और मंजू।

 

थैंक गॉड! ये दोनों अपने जीवन में सैटल हो गयी, मैंने खत पढ़कर कहा।

 

समय गुजरने लगा और प्रीती की एम-डी और महेश से बदला लेने की ख्वाहिश और ज्यादा तेज होने लगी। मैंने उसे सांतवना देते हुए कहा, प्रीती हिम्मत रखो! कोई रास्ता जरूर निकल आयेगा। मुझे क्या मालूम था कि रास्ता भविष्य में हमारा इंतज़ार कर रहा है।

 

एक दिन मैंने ऑफिस से लौट कर प्रीती को बताया कि महेश बरबाद हो गया है।    इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

क्यों कैसे?

 

तुम्हें याद है? उसने बताया था कि वो अपना सारा पैसा शेयर मॉर्केट में लगाता है। मॉर्केट बहुत नीचे गिर गया है और उसे भारी नुकसान लगा है। बेचारा रो रहा था मेरे सामने, कि उसके पास अब कुछ भी नहीं बचा है।

 

भगवान ने अच्छा सबक सिखाया है हरामी को!

 

हाँ प्रीती, वो तो आत्महत्या तक करने की सोच रहा है।

 

नहीं राज! उसे आत्महत्या नहीं करने देना, पहले मेरा बदला पूरा हो जाये, फिर चाहे वो आत्महत्या कर ले। राज तुमने क्या बताया उसे पैसे की तकलीफ है? इससे मेरे दिमाग में एक ऑयडिया आया है, प्रीती ने कहा।

 

मैंने प्रीती को बाँहों भरते हुआ पूछा, जल्दी से बताओ क्या ऑयडिया है?

 

अभी नहीं पहले मुझे सोचने दो, चलो चल कर सैलिब्रेट करते हैं, कहकर प्रीती ने मुझे बाँहों में भर लिया और अपने होंठ मेरे होंठ पर रख कर चूमने लगी।

 

उसने दो पैग बनाये और ड्रिंक पीने के बाद हम कपड़े उतार कर बिस्तर पर लेट गये। ओह राज! देखो तुम्हारा लंड कैसे तन कर खड़ा है, प्रीती ने मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ते हुए कहा।

 

पर मैं तो समझा था कि तुम अपने प्लैन के बारे में बताओगी?

 

ओहहह राज! प्लैन तो वेट कर सकता पर इस समय इस खड़े लंड की ज्यादा चिंता है, आओ और मुझे कस कर चोदो, प्रीती ने अपनी टाँगें फैला कर कहा।

 

जैसे ही मैंने अपना लंड उसकी चूत में घुसाया, ओहहहहहह राज!!! उसके मुँह से सिसकरी निकली।

 

राज! मैं आज कितनी खुश हूँ, मुझे महेश से बदला लेने का तरीका मिल गया।

 

प्रीती! अब महेश के बारे में सोचना छोड़ो और इस बात पे ध्यान दो कि मैं अब तुम्हारी चूत के साथ क्या करने वाला हूँ, मैंने अपना लंड तेजी से उसकी चूत के अंदर बाहर करते हुए कहा।

 

हाँ राज! मुझे चोदो, बहुत अच्छा लग रहा है, वो कहने लगी और मैं उसे और तेजी चोद रहा था। मेरा लंड पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रहा था।

 

मेरे ध्क्कों की रफ़्तार बढ़ते देख उसने अपनी दोनों टाँगें मेरी कमर पे जकड़ लीं और अपने कुल्हे उछाल कर थाप से थाप मिलाने लगी। उसके मुँह सिसकरियाँ निकल रही थी।

 

हाँआंआंआं राज!!! और  जोर से!!!!!, हाँआँआँ ऐसे ही करते जाओ, हाँ और अंदर तक घुसा दो..... ओहहहहह..... आआआआआआहहहहहह..... मैं तो अपनी मंज़िल के करीब हूँ। मेरा छुटाआआ!!! कहकर वो निढाल पड़ गयी।    इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

 

मेरा नहीं छूटा था, इसलिये मैं और तेजी से उसे चोदने लगा। लगता है तुम्हारा नहीं छुटा, उसने भी मेरा साथ देते हुए कहा।

 

नहीं, पर जल्द ही छूटने वाला है, और मैं जोर-जोर से अपने लंड को अंदर डालने लगा।

 

वो फिर मेरा साथ देने लगी, राज, रुको मत! हाँआँ चोदते जाओ... हाँआंआं लगता है मेरा फिर छूटने वाला है.... उसकी साँसें उखड़ रही थी।

 

ओहहहहहहह राज मेरा छूटाआआआ.... वो जोर से चिल्लायी और उसी वक्त मैंने भी अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।

 

हम दोनों एक दूसरे को बाँहों में भरे चूम रहे थे और एक दूसरे के बदन को सहला रहे थे। इससे मेरे लंड में फिर गर्मी आ गयी और वो खड़ा हो उसकी चूत पर झटके मारने लगा।

 

वो मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ कर बोली, राज अब मेरी गाँड मारो। मुझे भी गाँड मारने का शौक था, इसलिये उसके कहते ही मैं उसके पीछे आकर अपने थूक से उसकी गाँड को गीली करने लगा। राज ये मत करो!!! आज मेरी गाँड में ऐसे ही अपना लौड़ा घुसा दो, वो बोली।

 

पागल हो गयी हो? तुम्हें बहुत दर्द होगा!

 

होने दो राज! महेश भी हमेशा मेरी गाँड ऐसे ही मारता आया है। और अब अगर मेरा ऑयडिया काम कर गया तो मैं समझूँगी कि जैसे मैंने महेश की कोरी गाँड मारी है। इसलिये मैं बोलती हूँ वैसा करो, उसने कहा।

 

मेरे पास कोई चारा नहीं था। मैंने जोर से अपना लंड उसकी गाँड में डाल दिया।

 

ऊऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईईई माँआंआंआं.... मर गयीईईईई, उसके मुँह से चींख निकली। मैं उसकी गाँड मारने लगा और साथ ही उसकी चूत में अपनी अँगुली डाल कर उसे चोदने लगा। थोड़ी देर में ही हम दोनों का काम हो गया और दोनों एक दूसरे को बाँहों में ले कर सो गये।

 

सुबह मैंने उसे फिर पूछा, प्रीती! अब बताओ तुम्हारा प्लैन क्या है?

 

राज प्लैन सिंपल है, बस तुम्हारी मदद चाहिये। तुम्हारी मदद के बिना ये पूरा नहीं हो सकता, प्रीती खुश होती हुई बोली।

 

प्रीती! मैं तुम्हें पहले ही बोल चुका हूँ, तुम्हें मुझसे पूरी मदद मिलेगी जिससे तुम एम-डी और महेश से अपना बदला ले सको, अब बताओ।

 

ठीक है! सुनो मेरा प्लैन क्या है....

 

!!! क्रमशः !!!


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